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	<title>देश-विदेश &#8211; Fastball Files | Sports News &amp; More</title>
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	<description>Sports News, Lifestyle &#38; Entertainment Articles</description>
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	<title>देश-विदेश &#8211; Fastball Files | Sports News &amp; More</title>
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		<title>युद्धविराम खत्म होने से पहले अमेरिका भेजेगा और सैनिक</title>
		<link>https://fastballfiles.com/NewsArticle/161116/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Fastball Files]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 16 Apr 2026 12:32:31 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश-विदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[मध्य पूर्व में हालात एक बार फिर तनावपूर्ण होते नजर आ रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ चल रहे युद्धविराम के खत्म होने से पहले क्षेत्र में अतिरिक्त सैनिक भेजने की तैयारी शुरू कर दी है। अमेरिका सैनिक भेजने की तैयारी में  रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी प्रशासन &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><img width="721" height="394" src="https://fastballfiles.com/wp-content/uploads/2026/04/54-1.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy"></p>
<p>मध्य पूर्व में हालात एक बार फिर तनावपूर्ण होते नजर आ रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ चल रहे युद्धविराम के खत्म होने से पहले क्षेत्र में अतिरिक्त सैनिक भेजने की तैयारी शुरू कर दी है।</p>
<h3 class="wp-block-heading">अमेरिका सैनिक भेजने की तैयारी में </h3>
<p><strong>रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी प्रशासन को आशंका है कि जैसे ही युद्धविराम की अवधि समाप्त होगी, ईरान और उसके समर्थित समूह फिर से हमले तेज कर सकते हैं। इसी खतरे को देखते हुए अमेरिकी सेना अपनी मौजूदगी मजबूत करना चाहती है।</strong></p>
<p>बताया जा रहा है कि नए सैनिकों की तैनाती का मकसद सिर्फ रक्षा नहीं, बल्कि संभावित हमलों को रोकना और क्षेत्र में अमेरिकी हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है। खासकर खाड़ी क्षेत्र और रणनीतिक जलमार्गों में अमेरिका की सक्रियता बढ़ सकती है।</p>
<h3 class="wp-block-heading">वैश्विक व्यापार पर असर संभव</h3>
<p>रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अमेरिकी रक्षा विभाग ने पहले ही अतिरिक्त सैन्य संसाधनों को तैयार रहने के निर्देश दे दिए हैं। इसमें युद्धपोत, एयर डिफेंस सिस्टम और विशेष बल शामिल हो सकते हैं।</p>
<p>दूसरी ओर, ईरान की ओर से इस कदम को उकसावे वाली कार्रवाई के रूप में देखा जा सकता है, जिससे हालात और बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर युद्धविराम के बाद कोई बड़ा टकराव होता है, तो इसका असर पूरी दुनिया, खासकर तेल बाजार और वैश्विक व्यापार पर पड़ सकता है।</p>
</div>
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			</item>
		<item>
		<title>पाकिस्तान ने POK में सक्रिय किए 70 आतंकी लॉन्चपैड</title>
		<link>https://fastballfiles.com/NewsArticle/161118/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Fastball Files]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 16 Apr 2026 12:32:31 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश-विदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आइएसआइ और उसकी सेना ने एलओसी और अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास करीब 70 आतंकी लॉन्चपैड सक्रिय कर दिए हैं, जहां लगभग 800 आतंकियों को घुसपैठ के लिए तैयार रखा गया है। खुफिया सूत्रों के अनुसार, इन आतंकियों को छोटे-छोटे समूहों में बांटकर जम्मू-कश्मीर में एक साथ कई स्थानों से घुसपैठ कराने &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><img width="703" height="375" src="https://fastballfiles.com/wp-content/uploads/2026/04/6-14.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async"></p>
<p>पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आइएसआइ और उसकी सेना ने एलओसी और अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास करीब 70 आतंकी लॉन्चपैड सक्रिय कर दिए हैं, जहां लगभग 800 आतंकियों को घुसपैठ के लिए तैयार रखा गया है।</p>
<p>खुफिया सूत्रों के अनुसार, इन आतंकियों को छोटे-छोटे समूहों में बांटकर जम्मू-कश्मीर में एक साथ कई स्थानों से घुसपैठ कराने की योजना है, ताकि भारतीय सुरक्षा बलों पर दबाव बनाया जा सके। हर समूह में 10 से 15 प्रशिक्षित और हथियारबंद आतंकी शामिल हो सकते हैं, जिनका मकसद घाटी में बड़े हमलों को अंजाम देना है।</p>
<h3 class="wp-block-heading">भारतीय सीमा में घुसपैठ कराने की कोशिश</h3>
<p>बताया जा रहा है कि हाल के महीनों में भारतीय सुरक्षा बलों द्वारा कई घुसपैठ की कोशिशों को नाकाम करने के बाद पाकिस्तान ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है।</p>
<p>अब वह समन्वित और बहु-दिशात्मक घुसपैठ की योजना पर काम कर रहा है, जिससे कुछ आतंकी किसी भी हाल में भारतीय सीमा में प्रवेश कर सकें।</p>
<h3 class="wp-block-heading">अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का फायदा उठाना चाहता है पाक</h3>
<p>खुफिया एजेंसियों के मुताबिक, का फायदा मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और भारत में चल रही राजनीतिक गतिविधियों का फायदा उठाकर इस साजिश को अंजाम देना चाहता है।</p>
<p>विशेष रूप से लाइन आफ कंट्रोल के पास गतिविधियां तेज की गई हैं। हालांकि, भारतीय सेना और सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं और सीमा पर निगरानी कड़ी कर दी गई है।</p>
<p>पिछले अनुभवों के आधार पर घुसपैठ की हर कोशिश को विफल करने के लिए मजबूत रणनीति अपनाई जा रही है, जिससे पाकिस्तान की यह नई चाल भी नाकाम हो सकती है।</p>
</div>
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			</item>
		<item>
		<title>कच्चे तेल और गैस जहाजों की सुरक्षा पर नौसेना का विशेष ध्यान</title>
		<link>https://fastballfiles.com/NewsArticle/161104/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Fastball Files]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 16 Apr 2026 09:32:26 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश-विदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[भारतीय नौसेना के शीर्ष कमांडरों ने एक सम्मेलन में समुद्री सुरक्षा चुनौतियों और पश्चिम एशिया संकट का देश की ऊर्जा जरूरतों की रक्षा पर पड़ने वाले प्रभावों की व्यापक समीक्षा की। चीफ आफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्यों के संबंध में नौसेना के कमांडरों के साथ चर्चा की।  उन्होंने नौसेना &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><img width="700" height="406" src="https://fastballfiles.com/wp-content/uploads/2026/04/45-3.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy"></p>
<p>भारतीय नौसेना के शीर्ष कमांडरों ने एक सम्मेलन में समुद्री सुरक्षा चुनौतियों और पश्चिम एशिया संकट का देश की ऊर्जा जरूरतों की रक्षा पर पड़ने वाले प्रभावों की व्यापक समीक्षा की। चीफ आफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्यों के संबंध में नौसेना के कमांडरों के साथ चर्चा की। </p>
<p>उन्होंने नौसेना से युद्ध के तेजी से बदलते स्वरूप को ध्यान में रखते हुए ऐसी योजना बनाने का आग्रह किया, जिसमें आर्थिक और तकनीकी कारक शामिल हों। द्विवार्षिक नौसेना कमांडर सम्मेलन मंगलवार को नई दिल्ली में शुरू हुआ और गुरुवार को इसका समापन होगा। </p>
<h4 class="wp-block-heading">नौसेना के युद्ध तैयारी पर निरंतर ध्यान केंद्रित</h4>
<p>नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने अपने संबोधन में पश्चिम एशिया में युद्ध के बीच ऊर्जा समेत देश के समुद्री हितों की रक्षा करने में बल की उपलब्धियों की सराहना की। नौसेना के युद्ध तैयारी पर निरंतर ध्यान केंद्रित करने और नई तकनीकों को अपनाने पर लगातार ध्यान देने पर भी जोर दिया। </p>
<p>जानकारी के अनुसार, कमांडरों ने पश्चिम एशिया में युद्ध के बीच भारत की ऊर्जा जरूरतों को सुनिश्चित करने के लिए नौसैनिक तैनाती पर भी चर्चा की। पिछले कई वर्षों से नौसेना भारतीय ध्वज वाले वाणिज्यिक जहाजों विशेषकर प्राकृतिक गैस और कच्चा तेल ले जाने वाले जहाजों को ओमान की खाड़ी से सुरक्षित गुजरने में उन्हें एस्कार्ट कर रही है।</p>
</div>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>होर्मुज में ट्रंप की नाकेबंदी, भारत के 15 जहाज फंसे</title>
		<link>https://fastballfiles.com/NewsArticle/161106/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Fastball Files]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 16 Apr 2026 09:32:26 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश-विदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर पूर्ण नाकेबंदी की घोषणा कर दी है। इसके साथ ही अमेरिकी नौसेना के युद्धपोतों ने जलडमरूमध्य के बाहर तैनाती कर दी है, जबकि अमेरिकी वायु सेना अपनी अत्याधुनिक निगरानी प्रणालियों के साथ पूरे मार्ग को सील करने की कोशिश में जुटी हुई है। हालांकि अमेरिका ने &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><img loading="lazy" width="730" height="396" src="https://fastballfiles.com/wp-content/uploads/2026/04/4-5.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async"></p>
<p>अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर पूर्ण नाकेबंदी की घोषणा कर दी है। इसके साथ ही अमेरिकी नौसेना के युद्धपोतों ने जलडमरूमध्य के बाहर तैनाती कर दी है, जबकि अमेरिकी वायु सेना अपनी अत्याधुनिक निगरानी प्रणालियों के साथ पूरे मार्ग को सील करने की कोशिश में जुटी हुई है।</p>
<p>हालांकि अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों से आवाजाही पर प्रतिबंध लगाया है लेकिन क्षेत्र में स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। एक बड़ा कारण समुद्र में ईरान की ओर से लगाए गए बारूद भी हैं। भारत स्थिति को देखकर आगे की राह तय करेगा।</p>
<h3 class="wp-block-heading">होर्मुज में भारत के जो 15 जहाज फंसे</h3>
<p>भारत का शुरुआती आकलन है कि अगर अमेरिकी प्रतिबंध प्रभावी ढंग से लागू होते हैं तो यह उसके लिए फायदेमंद साबित होगा, क्योंकि नाकेबंदी केवल ईरानी बंदरगाहों से आने वाले जहाजों तक सीमित है। जबकि ईरान के साथ भारत का कारोबार बहुत सीमित है। होर्मुज में भारत के जो 15 जहाज फंसे हैं वो सभी गैर-ईरानी बंदरगाहों से तेल, गैस ले कर आ रहे हैं।</p>
<p>बहरहाल, इस नाकेबंदी के चलते ईरान के प्रमुख बंदरगाहों, जैसे बंदर अब्बास (सबसे बड़ा कंटेनर और बहुउद्देशीय बंदरगाह), खार्ग द्वीप (ईरान का प्राथमिक तेल निर्यात टर्मिनल, जहां से 90 फीसद कच्चा तेल निकलता है), असलूयेह (गैस और पेट्रोकेमिकल निर्यात का केंद्र), बंदर इमाम खुमैनी, बंदर-ए-महशहर और बंदर-ए-बुशहर से आने वाले सभी जहाजों पर रोक लग जाएगी।</p>
<p>वहीं, गैर-ईरानी बंदरगाहों जैसे संयुक्त अरब अमीरात के फुजैरा (भारत के लिए जरूरी), जेबेल अली और खलीफा पोर्ट, सऊदी अरब के रास तनुरा, कतर, कुवैत और इराक के कुछ टर्मिनल्स से तेल-गैस ले कर आने वाले जहाजों को अमेरिका सक्रिय मदद और सुरक्षा प्रदान करेगा। भारत के कुल तेल आयात का 40 से 55 फीसद इन्हीं गैर-ईरानी बंदरगाहों से आता है।</p>
<h3 class="wp-block-heading">अमेरिकी नाकेबंदी पर स्थिति साफ होने का इंतजार</h3>
<p>भारत के विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि, “सरकार होर्मुज क्षेत्र में अमेरिकी नाकेबंदी पर स्थिति साफ होने का इंतजार कर रही है। अमेरिका ने बाहर अपने नौसेना जहाजों को तैनात कर दिया है, लेकिन इससे जहाजों को सुरक्षित निकालने की कोई गारंटी नहीं है, खास तौर पर समुद्र में बिछाए गए बारूदी सुरंगों की वजह से।”</p>
<p>“ये सुरंगे ईरान ने बिछाई हैं और अभी तक जो जहाज वहां से निकल रहे थे, उन्हें ईरानी सेना के नेतृत्व में ही निकाला जा रहा था। ऐसे में होर्मुज से जहाजों को निकालने की क्या व्यवस्था हो रही है, इसकी स्थिति अगले 24 से 48 घंटों में साफ होने की उम्मीद है। अगर अमेरिका की पहल कामयाब होती है और वह होर्मुज से गैर-ईरानी बंदरगाहों से निकलने वाले जहाजों को सुरक्षा देता है तो ऊर्जा सुरक्षा के मोर्चे पर भारत को बड़ी राहत होगी।”</p>
<p>ईरान पर 28 फरवरी, 2026 को अमेरिका-इजरायल के हमले के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन बुरी तरह प्रभावित हो गई है। यह मार्ग भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद अहम है। विश्व की करीब 20 फीसद कच्चे तेल की आपूर्ति इसी संकीर्ण जलमार्ग से होकर गुजरती है, जिसमें भारत का बड़ा हिस्सा शामिल है।</p>
<h3 class="wp-block-heading">होर्मुज भारत के लिए सबसे तेज और सस्ता विकल्प</h3>
<p>पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्रालय में संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा का कहना है कि, “भारत पहले खाड़ी देशों से 60 फीसदी तेल खरीदता था, लेकिन अब विविधीकरण की नीति के तहत यह हिस्सा घटकर सिर्फ 30 फीसदी रह गया है।</p>
<p>करीब 70 फीसदी तेल अब रूस, अमेरिका, मैक्सिको, नाइजीरिया और गुयाना जैसे दूर-दराज के देशों से आ रहा है।” यह बदलाव पश्चिम एशिया संघर्ष शुरू होने के बाद दिखा है। फिर भी, खाड़ी क्षेत्र से आने वाला तेल भारत के लिए सबसे तेज और सस्ता विकल्प है।</p>
<p>स्टैंडर्ड एंड पुअर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका से जहाज भारत पहुंचने में तीन से चार हफ्ते, रूस से तीन हफ्ते और नाइजीरिया से कम से कम दो हफ्ते लगते हैं। वहीं, खाड़ी क्षेत्र से मात्र चार से सात दिनों में जहाज भारतीय तट पर पहुंच जाते हैं। वर्तमान में होर्मुज क्षेत्र में भारत के 15 जहाज फंसे हुए हैं, जो अन्य बंदरगाहों से तेल, गैस और अन्य सामान ले कर आ रहे हैं। युद्ध की शुरुआत के समय वहां 24 जहाज थे।</p>
<h3 class="wp-block-heading">भारत ने 9 जहाजों को बाहर निकाला</h3>
<p>भारत सरकार ने ईरान से बात करके 9 जहाजों को बाहर निकाला है। लेकिन पश्चिम एशिया के हालात नहीं सुधरे तो यह भारत की पूरी तेल इकोनॉमी पर दूरगामी असर डालेगा। खाड़ी देशों के मुकाबले अमेरिका, रूस, दक्षिण अमेरिकी देशों या अफ्रीका से तेल, गैस लाना महंगा सौदा है। इसका असर पूरे देश की इकोनॉमी पर होगा।</p>
<p>सरकार पहले से ही रूस और अन्य स्त्रोतों से आयात बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है, लेकिन होर्मुज जैसे चोकपॉइंट पर किसी भी अस्थिरता से ऊर्जा सुरक्षा को चुनौती मिलती है।</p>
<p>विदेश मंत्रालय और पेट्रोलियम मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, भारत स्थिति पर नजर रखते हुए वैकल्पिक मार्गों और आपूर्ति स्त्रोतों को और मजबूत करने की तैयारी में है। फिलहाल, 24-48 घंटों में स्पष्टता आने की उम्मीद है, जिससे न केवल फंसे जहाजों की सुरक्षा बल्कि दीर्घकालिक ऊर्जा आपूर्ति भी सुनिश्चित हो सकेगी।</p>
</div>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>वेदांता पावर प्लांट हादसे में मृतकों के परिजनों को 35 लाख और घायलों को 15 लाख देने का एलान</title>
		<link>https://fastballfiles.com/NewsArticle/161090/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Fastball Files]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 15 Apr 2026 12:32:24 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश-विदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में मौजूद वेदांता पावर प्लांट हादसे में कंपनी ने मृतकों और घायलों के लिए मुआवजे की घोषणा की है। जानकारी के अनुसार हादसे में जान गंवाने वाले मृतकों के परिजनों को 35 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। वहीं, गंभीर रूप से घायलों को 15 लाख रुपये तक का मुआवजा दिया &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><img width="702" height="380" src="https://fastballfiles.com/wp-content/uploads/2026/04/56-8.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy"></p>
<p>छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में मौजूद वेदांता पावर प्लांट हादसे में कंपनी ने मृतकों और घायलों के लिए मुआवजे की घोषणा की है। जानकारी के अनुसार हादसे में जान गंवाने वाले मृतकों के परिजनों को 35 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। वहीं, गंभीर रूप से घायलों को 15 लाख रुपये तक का मुआवजा दिया जाएगा।</p>
<p>इसके अलावा मृतकों के परिवार के एक सदस्य को स्थायी नौकरी देने का भी आश्वासन दिया गया है। इस घोषणा के बाद प्रभावित परिवारों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है, हालांकि स्थानीय लोग घटना की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। मालूम हो कि मंगलवार को पावर प्लांट में एक भीषण बायलर ब्लास्ट हुआ था।</p>
<h2 class="wp-block-heading">हादसे के समय प्लांट में करीब 50 लोग मौजूद थे</h2>
<p>जिसमें 14 मजदूरों की जान चली गई थी। इस भयावह हादसे में 32 मजदूर घायल भी हुए हैं, जिनमें से 6 जिंदगी और मौत के बीच वेंटिलेटर पर जंग लड़ रहे हैं। हादसे के समय प्लांट में करीब 50 मजदूर मौजूद थे। वहीं, हादसे के बाद वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने X पर पोस्ट करके अपनी पीड़ा व्यक्त की थी। उन्होंने इस घटना पर दुख जताते हुए इसे व्यक्तिगत क्षति बताया था।</p>
<p>जहां एक तरफ चेयरमैन इसे परिवार का दुख बता रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस के महासचिव कन्हैया अग्रवाल ने इसे सीधे तौर पर प्रबंधन की लापरवाही करार दिया है। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो प्लांट में सुरक्षा मानकों को ताक पर रखा गया था। इसके साथ ही ब्लास्ट इतना जोरदार था कि मजदूरों को संभलने तक का मौका नहीं मिला।</p>
<h2 class="wp-block-heading">सक्ती के वेदांता प्लांट में बनती है बिजली</h2>
<p>सक्ती जिले में मौजूद वेदांता पावर प्लांट में मुख्य रूप से बिजली उत्पादन का काम किया जाता है। इस प्लांट में कोयले का इस्तेमाल करके बिजली बनाई जाती है, जिसका उपयोग आसपास के औद्योगिक क्षेत्र और ग्रिड सप्लाई में होता है। प्लांट में कोयले की प्रोसेसिंग, बॉयलर संचालन और टर्बाइन के जरिए बिजली उत्पादन की प्रक्रिया चलती है।</p>
</div>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>चीन ने विदेशी कंपनियों पर कसा शिकंजा</title>
		<link>https://fastballfiles.com/NewsArticle/161092/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Fastball Files]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 15 Apr 2026 12:32:24 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश-विदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[तैयार माल की अधिकता से जूझ रहे चीन ने विदेशी कंपनियों के कामकाज से संबंधित नियम कड़े किए हैं। ऐसा चीन के आधारभूत ढांचे का लाभ लेते हुए विदेशी कंपनियों को उत्पादन करने और तैयार माल को निर्यात करने से रोकने की मंशा है। नए नियमों में विदेशी कंपनियों को चीनी कंपनियों का स्वरूप देकर &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><img width="699" height="404" src="https://fastballfiles.com/wp-content/uploads/2026/04/56-9.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy"></p>
<p>तैयार माल की अधिकता से जूझ रहे चीन ने विदेशी कंपनियों के कामकाज से संबंधित नियम कड़े किए हैं। ऐसा चीन के आधारभूत ढांचे का लाभ लेते हुए विदेशी कंपनियों को उत्पादन करने और तैयार माल को निर्यात करने से रोकने की मंशा है।</p>
<p>नए नियमों में विदेशी कंपनियों को चीनी कंपनियों का स्वरूप देकर कार्य करने और चीन की कंपनियों के साथ गठजोड़ करने के नियम भी कड़े किए गए हैं। इन नए नियमों पर प्रधानमंत्री ली कछियांग ने सात अप्रैल को हस्ताक्षर किए हैं। नए नियम चीन में लागू हो गए हैं। चीन के सामान का सरप्लस स्टाक पूरे विश्व के लिए समस्या बन गया है।</p>
<p>यूक्रेन युद्ध के चलते पहले से धीमी आर्थिक तरक्की की रफ्तार को ईरान युद्ध ने लगभग ठप कर दिया है। ऐसे में विश्व के सबसे बड़े निर्यातक देश चीन के तैयार माल की खपत घटी है और चीन के गोदाम, बंदरगाह और उपभोक्ता देशों के भंडार गृह चीनी माल से भर गए हैं। इससे विश्व स्तर पर चिंता पैदा हो गई है।</p>
<p>विदेशी कंपनियों के लिए चीन के नए नियम इसी समस्या से निपटने के लिए हैं। पिछले वित्त वर्ष में चीन का कुल निर्यात 10 खरब डालर के आंकड़े को पार कर गया था। लेकिन ताजा वर्ष की पहली तिमाही में चीनी माल की बिक्री और खपत धीमी पड़ गई है।</p>
<p>इससे चीनी कारखानों में उत्पादन कम करना पड़ा है और वहां पर बड़ी संख्या में कर्मचारियों की छंटनी का खतरा पैदा हो गया है। इन स्थितियों से निपटने के लिए चीन ने 18 बिंदुओं वाले नए नियम लागू किए हैं। इन नियमों का उल्लंघन करने वाली विदेशी कंपनियों और उनका सहयोग करने वाली चीनी कंपनियों के लिए कड़े दंड का प्रविधान किया गया है।</p>
</div>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>होर्मुज की नाकेबंदी से अमेरिका दोहराने जा रहा 60 साल पुरानी ब्रिटिश भूल</title>
		<link>https://fastballfiles.com/NewsArticle/161094/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Fastball Files]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 15 Apr 2026 12:32:24 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश-विदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[अमेरिका द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी का फैसला सिर्फ एक सैन्य कदम नहीं, बल्कि एक जटिल क्षेत्रीय ताने-बाने को नजरअंदाज करने वाला जोखिम भरा दांव माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह संकट केवल तेल आपूर्ति या समुद्री मार्गों तक सीमित नहीं, बल्कि इतिहास, समाज और स्थानीय पहचान की गहरी परतों से &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><img loading="lazy" width="725" height="404" src="https://fastballfiles.com/wp-content/uploads/2026/04/67-2.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async"></p>
<p>अमेरिका द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी का फैसला सिर्फ एक सैन्य कदम नहीं, बल्कि एक जटिल क्षेत्रीय ताने-बाने को नजरअंदाज करने वाला जोखिम भरा दांव माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह संकट केवल तेल आपूर्ति या समुद्री मार्गों तक सीमित नहीं, बल्कि इतिहास, समाज और स्थानीय पहचान की गहरी परतों से जुड़ा है, जिसे समझे बिना कोई भी बाहरी शक्ति सफल नहीं हो सकती।</p>
<p><strong>विशेषज्ञ इस पूरे घटनाक्रम की तुलना 1956 के स्वेज संकट से कर रहे हैं, जब ब्रिटेन बदलते वैश्विक और क्षेत्रीय हालात को समझने में नाकाम रहा था। उसने मिस्त्र पर सैन्य दबाव बनाकर नहर पर नियंत्रण बनाए रखना चाहा, लेकिन अंतरराष्ट्रीय विरोध और अमेरिका-सोवियत दबाव के आगे झुकना पड़ा, जिससे उसके वैश्विक प्रभुत्व के अंत की शुरुआत हुई।</strong></p>
<p>करीब 40 दिनों तक चले अमेरिका-इजरायल और ईरान के टकराव के बाद शांति वार्ता टूटने के तुरंत बाद होर्मुज की नाकेबंदी का फैसला सामने आया है। ऐसे में होर्मुज, जिसे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की धमनी माना जाता है, अब एक बड़े भू-राजनीतिक टकराव का केंद्र बन गया है।</p>
<h3 class="wp-block-heading">तेल राजतंत्रों की जड़ें और पश्चिमी रणनीति की विरासत</h3>
<p>होर्मुज पर नियंत्रण की लड़ाई नई नहीं है। 17वीं सदी में पुर्तगालियों के बाद ब्रिटेन ने यहां अपना प्रभुत्व स्थापित किया और स्थानीय कबीलों व शेखों को साथ लेकर समुद्री मार्गों को सुरक्षित बनाया। यही प्रक्रिया आगे चलकर खाड़ी के आधुनिक तेल राजतंत्रों – यूएई, कतर, बहरीन और कुवैत- की नींव बनी।</p>
<p>1971 के बाद जब अमेरिका ने ब्रिटेन की जगह ली, तो उसने भी इन्हीं शासक परिवारों पर भरोसा बनाए रखा। लेकिन इस दौरान क्षेत्र की जटिल सामाजिक और सांस्कृतिक विविधताओं को काफी हद तक नजरअंदाज किया गया- जो आज की अस्थिरता की एक बड़ी वजह मानी जा रही है।</p>
<h3 class="wp-block-heading">दिखने वाली एकता के पीछे छिपी विविधता</h3>
<p>खाड़ी क्षेत्र को अक्सर अरब-सुन्नी और ईरानी-शिया पहचान के आधार पर देखा जाता है, लेकिन वास्तविकता इससे कहीं अधिक जटिल है। ईरान के उत्तरी तट पर अरब और बलूच समुदाय रहते हैं, जिनके तेहरान के साथ संबंध हमेशा सहज नहीं रहे।</p>
<p>वहीं ओमान के मुसंदम प्रायद्वीप जैसे इलाकों में कुमजारी भाषा बोलने वाले समुदाय हैं, जिनकी पहचान समुद्र से गहराई से जुड़ी है और जो खुद को पारंपरिक राष्ट्रीय सीमाओं से अलग महसूस करते हैं।</p>
<p>इन समुदायों की यही अलग पहचान मौजूदा संकट में निर्णायक भूमिका निभा सकती है- खासतौर पर तब, जब राज्य की पकड़ कमजोर होती दिख रही हो।</p>
<h3 class="wp-block-heading">ईरान कमजोर हुआ तो उभरेंगे स्थानीय समूह</h3>
<p>विशेषज्ञों के अनुसार, इजरायल और अमेरिका के लगातार दबाव के बीच ईरान की केंद्रीय सत्ता कमजोर हुई है और शक्ति का केंद्रीकरण आईआरजीसी (ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर) के सीमित दायरे में सिमटता जा रहा है।</p>
<p>ऐसे हालात में होर्मुज के आसपास रहने वाले विभिन्न जातीय और क्षेत्रीय समूह अधिक मुखर हो सकते हैं, जिससे स्थिति और जटिल होने की आशंका है।</p>
<h3 class="wp-block-heading">ओमान-यूएई तनाव और नया सामरिक खतरा</h3>
<p>संकट का एक और अहम पहलू खाड़ी देशों के आपसी मतभेद हैं। जहां यूएई ईरान के खिलाफ सख्त रुख अपनाए हुए है, वहीं ओमान पारंपरिक रूप से संतुलित और मध्यस्थ की भूमिका में रहा है।</p>
<p>रिपोर्टों में यह भी संकेत मिला है कि होर्मुज में संभावित टोल सिस्टम को लेकर ओमान और ईरान के बीच चर्चा हुई, हालांकि मस्कट ने इससे इन्कार किया है।</p>
<p>मुसंदम प्रायद्वीप, जो रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है, को लेकर यूएई और ओमान के बीच तनाव की संभावना भी जताई जा रही है। स्थानीय पहचान की राजनीति का इस्तेमाल कर इस क्षेत्र पर प्रभाव बढ़ाने की कोशिशें भविष्य में बड़े टकराव का कारण बन सकती हैं।</p>
</div>
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		<title>2035 तक अपना स्पेस स्टेशन बनाएगा भारत</title>
		<link>https://fastballfiles.com/NewsArticle/161088/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Fastball Files]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 15 Apr 2026 12:32:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश-विदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने भारत के महत्वाकांक्षी स्पेस स्टेशन प्रोजेक्ट ‘भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन’ के निर्माण में रूस के साथ साझेदारी की इच्छा जताई है। इसरो के वरिष्ठ अधिकारी ने मॉस्को में आयोजित एक अंतरिक्ष मंच पर यह जानकारी दी। इसरो प्रोपल्शन कॉम्प्लेक्स के निदेशक ए. पकीराज ने कहा कि BAS के विकास में रूस &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><img width="722" height="399" src="https://fastballfiles.com/wp-content/uploads/2026/04/5-15.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy"></p>
<p>भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने भारत के महत्वाकांक्षी स्पेस स्टेशन प्रोजेक्ट ‘भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन’ के निर्माण में रूस के साथ साझेदारी की इच्छा जताई है।</p>
<p>इसरो के वरिष्ठ अधिकारी ने मॉस्को में आयोजित एक अंतरिक्ष मंच पर यह जानकारी दी।</p>
<p>इसरो प्रोपल्शन कॉम्प्लेक्स के निदेशक ए. पकीराज ने कहा कि BAS के विकास में रूस के अनुभव का लाभ उठाने के लिए भारत सहयोग चाहता है। उन्होंने कहा कि कंट्रोल सिस्टम, पावर सप्लाई, कम्युनिकेशन और ट्रैकिंग जैसे महत्वपूर्ण सब-सिस्टम में दोनों देश मिलकर काम कर सकते हैं।</p>
<p><strong>2035 तक तैयार होगा भारत का स्पेस स्टेशन<br /></strong>इसरो के मुताबिक, भारत का प्रस्तावित स्पेस स्टेशन 2035 तक तैयर होगा और पृथ्वी से करीब 450 किमी की ऊंचाई पर स्थापित किया जाएगा और इसका झुकाव 51.6 डिग्री होगा।</p>
<p>यह रूसी स्पेस स्टेशन आरओएस के समान होगा। भारत अन्य अंतरिक्ष एजेंसियों के साथ भी सहयोग की संभावनाएं तलाश रहा है।</p>
<p><strong>ISS के बाद नए अवसर<br /></strong>मौजूदा इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन को 2030-31 तक डीकमीशन किए जाने की योजना है। ऐसे में वैश्विक स्तर पर नए स्पेस स्टेशनों के निर्माण और सहयोग के अवसर बढ़ रहे हैं। फिलहाल चीन के पास ही एक सक्रिय मानवयुक्त स्पेस स्टेशन है।</p>
<p><strong>रूस की तकनीकी मदद अहम<br /></strong>रूस, भारत को ऑर्बिटल मॉड्यूल, लाइफ सपोर्ट सिस्टम, और डॉकिंग सिस्टम जैसी महत्वपूर्ण तकनीकों में सहयोग दे सकता है। रूस के पास ‘Mir’ स्पेस स्टेशन और ISS के रूसी हिस्से ‘रशियन ऑर्विटल सेग्मेंट’ का व्यापक अनुभव है।</p>
<p><strong>दशकों पुराना अंतरिक्ष सहयोग<br /></strong>भारत और रूस के बीच अंतरिक्ष सहयोग का लंबा इतिहास रहा है।</p>
<p>1984 में राकेश शर्मा को अंतरिक्ष में भेजने में सोवियत संघ (अब रूस) ने मदद की थी।<br />1975 में भारत के पहले उपग्रह आर्यभट का प्रक्षेपण भी सोवियत संघ से हुआ था।<br />क्रायोजेनिक इंजन तकनीक और गगनयान मिशन के लिए अंतरिक्ष यात्रियों के प्रशिक्षण में भी रूस ने अहम भूमिका निभाई है।</p>
<p>भारत और रूस की यह साझेदारी दोनों देशों के ‘विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक संबंध’ का मजबूत आधार रही है। अब BAS प्रोजेक्ट के जरिए यह सहयोग अंतरिक्ष में एक नए अध्याय की शुरुआत कर सकता है।</p>
</div>
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		<title>जल जीवन मिशन के नए चरण पर असमंजस में 20 से अधिक राज्य</title>
		<link>https://fastballfiles.com/NewsArticle/161040/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Fastball Files]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 14 Apr 2026 09:32:42 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश-विदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[हर घर नल जल पहुंचाने के लिए शुरू किए जल जीवन मिशन के अधूरे प्रोजेक्टों को पूरा करने और जल आपूर्ति की व्यवस्था को स्थाई रूप देने के लिए भले ही केंद्र सरकार ने नए चरण को मंजूरी दी है और इसके लिए 1.51 लाख करोड़ की राशि जारी की है। लेकिन अब तक 20 &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><img width="725" height="391" src="https://fastballfiles.com/wp-content/uploads/2026/04/5-11.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy"></p>
<p>हर घर नल जल पहुंचाने के लिए शुरू किए जल जीवन मिशन के अधूरे प्रोजेक्टों को पूरा करने और जल आपूर्ति की व्यवस्था को स्थाई रूप देने के लिए भले ही केंद्र सरकार ने नए चरण को मंजूरी दी है और इसके लिए 1.51 लाख करोड़ की राशि जारी की है। लेकिन अब तक 20 से अधिक राज्य नए चरण से जुड़ने को लेकर असमंजस में है। उन्होंने अब तक मिशन से जुड़ने के किए केंद्र से साथ जरूरी करार भी नहीं किए है।</p>
<p>इन राज्यों में बिहार, कर्नाटक, तमिलनाडु, बंगाल व झारखंड जैसे प्रमुख राज्य शामिल है।राज्यों के इस रवैए के बाद भी जल शक्ति मंत्रालय इन सभी राज्यों को मिशन से जोड़ने के लिए चर्चा कर रहा है। सूत्रों की मानें तो इनमें से कुछ राज्य सहमत हो गए है, ऐसे में जल्द ही इनके साथ करार हो सकता है।</p>
<h3 class="wp-block-heading">मिशन के नए चरण का मुख्य फोकस</h3>
<p>वहीं, मिशन के इस नए चरण के तहत अब तक जिन 12 राज्यों के साथ करार हो चुका है, उनमें उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गोवा, राजस्थान, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, मेघालय, हरियाणा व छत्तीसगढ़ शामिल है।</p>
<p>इनमें उत्तर प्रदेश व महाराष्ट्र जैसे राज्यों को वित्तीय मदद भी जारी कर दी गई है। मिशन के नए चरण का मुख्य फोकस केवल पानी पहुंचाने तक सीमित नहीं है बल्कि जल आपूर्ति की गुणवत्ता, प्रबंधन और डिजिटल मैपिंग पर भी किया गया है।</p>
<h3 class="wp-block-heading">2028 तक हर घर को नल जल</h3>
<p>मिशन जुड़े सूत्रों के मुताबिक अब राज्यों के असमंजस के पीछे मुख्य वजह वह करार है, जिसके तहत उन्हें वर्ष 2028 तक हर घर को नल जल देना सुनिश्चित करना होगा। साथ ही पानी की गुणवत्ता को सुनिश्चित करने व नल जल योजनाओं की देखरेख और प्रबंधन के लिए एक तंत्र खड़ा करने जैसे लक्ष्य है।</p>
<p>राज्यों का कहना है कि इन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए जो खर्च आएगा, वहीं उन्हें दी जा रही राशि से काफी कम है। वैसे भी प्रत्येक राज्य की भौगोलिक परिस्थितियां अलग-अलग है। ऐसे में सभी को एक जैसे मानकों के दायरे में रखना ठीक नहीं है।</p>
</div>
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		<title>थल और वायु सेना ने सियाचिन की रक्षा करने वाले बहादुरों को दी श्रद्धांजलि</title>
		<link>https://fastballfiles.com/NewsArticle/161042/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Fastball Files]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 14 Apr 2026 09:32:42 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश-विदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[भारतीय सेना और वायु सेना ने सोमवार को दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र की रक्षा करने वाले भारत के बहादुर सैनिकों के अदम्य साहस, अटूट प्रतिबद्धता और सर्वोच्च बलिदान को सलाम किया। ऑपरेशन मेघदूत के 42 साल पूरे होने पर दोनों सेनाओं ने पृथ्वी के कुछ सबसे कठिन इलाकों और मौसम की स्थिति में वीरता, &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><img width="685" height="381" src="https://fastballfiles.com/wp-content/uploads/2026/04/3.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy"></p>
<p>भारतीय सेना और वायु सेना ने सोमवार को दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र की रक्षा करने वाले भारत के बहादुर सैनिकों के अदम्य साहस, अटूट प्रतिबद्धता और सर्वोच्च बलिदान को सलाम किया।</p>
<p>ऑपरेशन मेघदूत के 42 साल पूरे होने पर दोनों सेनाओं ने पृथ्वी के कुछ सबसे कठिन इलाकों और मौसम की स्थिति में वीरता, धीरज और परिचालन उत्कृष्टता द्वारा परिभाषित विरासत को श्रद्धांजलि दी।</p>
<h2 class="wp-block-heading">13 अप्रैल को क्यों मनाया जाता है सियाचिन दिवस?</h2>
<p>13 अप्रैल को सियाचिन दिवस के रूप में मनाया जाता है, क्योंकि इसी दिन 1984 में ऑपरेशन मेघदूत शुरू किया गया था, जब भारतीय सेना और वायु सेना उत्तरी लद्दाख क्षेत्र पर हावी होने वाली ऊंचाइयों को सुरक्षित करने के लिए सियाचिन ग्लेशियर तक आगे बढ़ी थी।</p>
<h2 class="wp-block-heading">सेना ने क्या कहा?</h2>
<p>वायु सेना ने कहा, ”इस सियाचिन दिवस पर भारतीय वायुसेना दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र की रक्षा करने वाले बहादुर योद्धाओं के अदम्य साहस, अटूट प्रतिबद्धता और सर्वोच्च बलिदान को सलाम करती है। रणनीतिक एयरलिफ्ट और रसद सहायता से लेकर, अत्यधिक ऊंचाई वाली स्थितियों में हताहतों की निकासी तक भारतीय वायुसेना सियाचिन में परिचालन तत्परता बनाए रखना जारी रखती है।”</p>
<p>वहीं, सेना के उत्तरी कमान ने कहा, ”सियाचिन दिवस के अवसर पर लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा, सेना कमांडर एनसी और उत्तरी कमान के सभी बहादुर के अटूट साहस और प्रतिबद्धता का सम्मान करते हैं जो दृढ़ता से बर्फीली ऊंचाइयों की रक्षा कर रहे हैं। हम उन बहादुर आत्माओं को भी याद करते हैं और उन्हें श्रद्धांजलि देते हैं जिन्होंने दुनिया के सबसे ऊंचे युद्ध के मैदान पर अपने प्राण न्यौछावर कर दिए।”</p>
</div>
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