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भावुक पोस्ट के साथ युजवेंद्र चहल ने फर्स्ट-क्लास क्रिकेट से लिया संन्यास

 भारत के लेग-स्पिनर युजवेंद्र चहल ने शुक्रवार को फर्स्ट-क्लास क्रिकेट से संन्यास की घोषणा की। इसके साथ ही उनके 17 साल लंबे रेड-बॉल करियर का समापन हो गया। चहल ने कहा कि टेस्ट क्रिकेट खेलने का उनका सपना शायद पूरा न हो पाए, लेकिन वह भारत के लिए व्हाइट-बॉल क्रिकेट खेलना जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

35 साल के इस खिलाड़ी ने भारत के लिए 72 वनडे और 80 T20I मैच खेले हैं, लेकिन उन्हें कभी टेस्ट मैच खेलने का मौका नहीं मिला। उन्होंने अपना आखिरी इंटरनेशनल मैच अगस्त 2023 में वेस्टइंडीज के खिलाफ (T20I) खेला था। चहल ने 2009 में हरियाणा के लिए अपना फर्स्ट-क्लास डेब्यू किया था। उन्होंने 49 मैचों में 32.27 की औसत से 148 विकेट लेकर अपना रेड-बॉल करियर खत्म किया। उन्होंने अपना आखिरी फर्स्ट-क्लास मैच लॉर्ड्स में खेला।

चहल ने कहा कि टेस्ट कैप पहनना उनके पूरे करियर में एक सपना ही बना रहा। चहल ने इंस्टाग्राम पर लिखा, “मैंने जो पहली क्रिकेट बॉल पकड़ी थी, वह रेड बॉल ही थी। मैं 10 साल का था और मुझे तब अंदाजा भी नहीं था कि मुझे इस खेल से कितना गहरा लगाव हो जाएगा। मेरे लिए रेड-बॉल क्रिकेट कभी भी सिर्फ एक और फॉर्मेट नहीं था। इसी खेल ने मुझे सब्र, चरित्र, मुश्किलों से उबरने की क्षमता और घंटों तक मैदान पर डटे रहकर हर रन और हर विकेट के लिए संघर्ष करने की असली खुशी का मतलब सिखाया।

उन्‍होंने लिखा, “मैंने अपना आखिरी फर्स्ट-क्लास मैच लॉर्ड्स में खेला था। यह कहते हुए भावुकता महसूस होती है क्योंकि टेस्ट कैप पाना हमेशा से मेरा सपना रहा था, जिसे मैंने कई सालों तक संजोकर रखा था। भले ही वह सपना पूरा नहीं हो पाया, लेकिन मैं अपने अब तक के सफर से सचमुच संतुष्ट हूं और इस फॉर्मेट में मिले हर मौके के लिए बेहद आभारी हूं।”

चहल ने लिखा, “लाल गेंद ने मुझे मेरी जिंदगी की कुछ सबसे खूबसूरत यादें दीं। कोई भी चीज कभी भी मुझसे उन्हें छीन नहीं पाएगा। मैंने अभी हार नहीं मानी है। अपने देश के लिए खेलने की भूख अभी भी मुझमें बरकरार है। मुझे यकीन है कि मुझमें अभी भी क्रिकेट बाकी है और वनडे-T20 फॉर्मेट में एक और मौका पाने के लिए मैं अपनी पूरी जान लगा दूंगा।”

चहल ने अपने पूरे करियर में साथ देने के लिए हरियाणा क्रिकेट एसोसिएशन और उसके पूर्व अधिकारियों का भी शुक्रिया अदा किया। चहल ने कहा, “हरियाणा क्रिकेट एसोसिएशन, रणबीर सिंह महिंद्रा सर और अनिरुद्ध सिंह चौधरी सर का उनके लगातार सहयोग, भरोसे और विश्वास के लिए खास तौर पर शुक्रिया। 10 साल की उम्र में पहली बार लाल गेंद थामने से लेकर अपना आखिरी फर्स्ट-क्लास मैच खेलने तक, यह सफर बहुत ही शानदार रहा है।”

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