लगातार 21 मेडन ओवर फेंकने का रिकॉर्ड, इस भारतीय स्पिनर ने अंग्रेजों के छक्के छुड़ा दिए थे
क्रिकेट के मैदान पर आए दिन कई रिकॉर्ड बनते और टूटते हैं। हालांकि, कुछ रिकॉर्ड ऐसे होते हैं जो इतिहास में अमर हो जाते हैं। फटाफट क्रिकेट के इस युग में जहां लगभग हर गेंद पर बाउंड्री की बारिश देखने को मिलती है, वहीं एक गेंदबाज ऐसा भी था जिसने 131 गेंदों पर (21 मेडन ओवर) कोई रन नहीं बनने दिया था।
इस भारतीय स्पिनर ने अंग्रेजों को एक-एक रन के लिए तरसा दिया था। यह एक ऐसा अनोखा रिकॉर्ड है, जो क्रिकेट के पन्नों में हमेशा के लिए अमर हो गया है। आज के युग में इसे तोड़ना नामुमकिन सा लगता है।
भारत दौरे पर था इंग्लैंड
बात है साल जनवरी 1964 की, इंग्लैंड टीम भारत के दौरे पर थी। भारत और इंग्लैंड के बीच मद्रास (चेन्नई) के मैदान पर सीरीज का पहला टेस्ट मैच खेला जा रहा था। इस 551वें टेस्ट मैच में भारतीय लेफ्ट आर्म स्पिनर बापू नाडकर्णी ने अपनी फिरकी का ऐसा जादू चलाया कि पूरी इंग्लैंड टीम बेबस नजर आई। बापू नाडकर्णी की गेंदों में इतनी गजब की सटीकता और लाइन-लेंथ थी कि अंग्रेज बल्लेबाज शॉट खेलना तो दूर, गेंद को सिर्फ डिफेंड करने पर मजबूर हो गए थे।
सबसे कंजूस स्पेल डाला
बापू नाडकर्णी ने मुकाबले में ऐसा स्पेल डाला, जिसे क्रिकेट इतिहास का सबसे कंजूस स्पेल कहा जाता है। नाडकर्णी ने इंग्लैंड की पहली पारी में लगातार 21 मेडन ओवर किए थे। इस मुकाबले में अगर बापू के प्रदर्शन की बात करें तो उन्होंने 32 ओवर गेंदबाजी की और 27 ओवर में कोई रन नहीं दिया था।
अपने स्पेल में बापू ने सिर्फ 0.15 की इकोनॉमी से 5 रन ही दिए थे। हालांकि , उनके खाते में कोई विकेट नहीं आया था। इंग्लैंड की दूसरी पारी में बापू ने 6 ओवर गेंदबाजी की थी और 6 रन दिए थे। इस दौरान उन्होंने 4 मेडन ओवर फेंके थे और 2 सफलताएं भी प्राप्त की थीं।
ड्रॉ पर समाप्त हुआ था टेस्ट मैच
भारत और इंग्लैंड के बीच खेला गया यह मुकाबला ड्रॉ रहा था।
भारतीय कप्तान मंसूर अली खान पटौदी ने टॉस जीतकर बल्लेबाजी करने का फैसला लिया था।
बुद्धि कुंदरन (192) और विजय मांजरेकर (108) के शतक की बदौलत भारतीय टीम ने पहली पारी 457/7 पर घोषित की थी।
जवाब में इंग्लैंड टीम पहली पारी में 317 रन पर सिमट गई थी।
टीम इंडिया ने दूसरी पारी 152/9 पर घोषित की।
जवाब में इंग्लैंड ने 5वें दिन के अंत तक 241/5 स्कोर किया था।


