कच्चे तेल और गैस जहाजों की सुरक्षा पर नौसेना का विशेष ध्यान
भारतीय नौसेना के शीर्ष कमांडरों ने एक सम्मेलन में समुद्री सुरक्षा चुनौतियों और पश्चिम एशिया संकट का देश की ऊर्जा जरूरतों की रक्षा पर पड़ने वाले प्रभावों की व्यापक समीक्षा की। चीफ आफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्यों के संबंध में नौसेना के कमांडरों के साथ चर्चा की।
उन्होंने नौसेना से युद्ध के तेजी से बदलते स्वरूप को ध्यान में रखते हुए ऐसी योजना बनाने का आग्रह किया, जिसमें आर्थिक और तकनीकी कारक शामिल हों। द्विवार्षिक नौसेना कमांडर सम्मेलन मंगलवार को नई दिल्ली में शुरू हुआ और गुरुवार को इसका समापन होगा।
नौसेना के युद्ध तैयारी पर निरंतर ध्यान केंद्रित
नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने अपने संबोधन में पश्चिम एशिया में युद्ध के बीच ऊर्जा समेत देश के समुद्री हितों की रक्षा करने में बल की उपलब्धियों की सराहना की। नौसेना के युद्ध तैयारी पर निरंतर ध्यान केंद्रित करने और नई तकनीकों को अपनाने पर लगातार ध्यान देने पर भी जोर दिया।
जानकारी के अनुसार, कमांडरों ने पश्चिम एशिया में युद्ध के बीच भारत की ऊर्जा जरूरतों को सुनिश्चित करने के लिए नौसैनिक तैनाती पर भी चर्चा की। पिछले कई वर्षों से नौसेना भारतीय ध्वज वाले वाणिज्यिक जहाजों विशेषकर प्राकृतिक गैस और कच्चा तेल ले जाने वाले जहाजों को ओमान की खाड़ी से सुरक्षित गुजरने में उन्हें एस्कार्ट कर रही है।



