टूटी पिच ने जोड़ा देवदत्त पडिक्कल का करियर, लगातार अभ्यास करके हीरो बने
अगर आप मानसिक तौर पर मजबूत, अनुशासित और कुछ करने का जज्बा रखते हैं तो जिंदगी आपको जीरो से हीरो बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ती। कुछ ऐसा ही हो रहा है भारत के नए नंबर-3 बल्लेबाज देवदत्त पडिक्कल के साथ।
2024 के ऑस्ट्रेलिया दौरे में गए देवदत्त पर्थ में दोनों पारियों में फेल हो गए जिसके बाद उनको ड्रॉप कर दिया गया। भारतीय टीम से बाहर होने के बाद देवदत्त परेशान हुए लेकिन उन्होंने खुद से वापसी का वादा किया।
एक नई शुरुआत के लिए अपने बचपन के कोच मोहम्मद नसीरुद्दीन के पास वापस गए और लगभग दो साल बाद गाल में श्रीलंका के विरुद्ध 167 रनों की पारी खेलकर खुद को नंबर-3 बल्लेबाज के तौर पर स्थापित कर लिया।
शतक मारने के बाद देवदत्त ने कहा कि मुझे पता था कि यहां की तेज गर्मी के बीच गाल की नमी वाली पिच पर बल्लेबाजी करना आसान नहीं होगा। विकेट बल्लेबाजी के लिए बहुत आसान नहीं था। मुझे यह भी पता था कि थकान होगी। शरीर से बहुत सारा फ्लूइड निकलेगा। मैंने इसी तरह की परिस्थितियों के लिए तैयारी की थी।
भारतीय टीम प्रबंधन और दुनिया भले ही अब देवदत्त का गुणगान गा रही हो लेकिन अगर साई सुदर्शन चोटिल नहीं होते तो वह यहां नंबर तीन पर बल्लेबाजी करने न उतरते। देवदत्त ने मौके का फायदा उठाया। उनकी पारी ने साफ बताया कि उन्होंने अपना बल्लेबाजी स्टांस बदला है। उनका बैकलिफ्ट भी बदल गया है और वह मानसिक तौर पर और मजबूत हो गए हैं।
पहले उनकी बल्लेबाजी में आक्रामकता के साथ डिफेंस का संयोजन ज्यादा नहीं दिखता था लेकिन अब उन्होंने अपने तकनीकि पहलुओं को सकारात्मक तौर पर बदल दिया है। इसको लेकर उन्होंने बेंगलुरु में अपने बचपन के कोच मोहम्मद नसीरुद्दीन के साथ काफी तैयारी की।
नसीरुद्दीन ने कहा कि देवदत्त को भारत-ए के साथ श्रीलंका दौरे पर जाने का मौका मिला। उन्होंने पहले मैच की दो पारियों में 12 और 64 रन बनाए। दूसरे मैच में 94 रन बनाए। तभी उन्हें श्रीलंकाई पिच का चरित्र समझ में आया।
बेंगलुरु लौटने के बाद उन्होंने मुझसे तैयारी पर बात की। उन्होंने बेंगलुरु में टर्नर पिच पर अभ्यास किया। ऐसी पिचों पर भी अभ्यास किया जिसमें क्रैक्स थे। वह बेंगलुरु में बाएं हाथ के स्पिनरों और ऑफ स्पिनरों के साथ ऐसी पिचों पर हर दिन करीब ढाई घंटे बल्लेबाजी का अभ्यास करते थे।
नसीरुद्दीन ने कहा कि देवदत्त की सबसे बड़ी खूबी ये है कि वह सीखना चाहते हैं। वह मानसिक तौर पर परिपक्व हैं। चाहे कितनी भी मुश्किलें आ जाएं, वह टूटते नहीं हैं। वह कभी थकते नहीं थे।
नसीरुद्दीन ने कहा कि हमने देवदत्त के अभ्यास के लिए विशेष तौर पर एक टूटी पिच बनाई थी जिस पर स्पिनरों को जबरदस्त मदद मिलती थी। वह वहां लगातार अभ्यास करते थे। देवदत्त हर तरह के स्पिनर के विरुद्ध अभ्यास करके सफल हुए। वह स्वतंत्रता दिवस पर अविजित टेस्ट शतक लगाने वाले भारत के पहले बल्लेबाज बने।
मालूम हो कि कोच गौतम गंभीर के कार्यकाल वाले भारतीय टीम प्रबंधन ने टेस्ट में नंबर तीन पर कुल सात बल्लेबाजों को आजमाया, जिनमें करुण नायर, साई सुदर्शन, वॉशिंगटन सुंदर भी शामिल रहे लेकिन सफलता पडिक्कल को मिली।
भारतीय टीम के बल्लेबाजी कोच सितांशु कोटक ने भी पडिक्कल की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने शानदार बल्लेबाजी की है। मैंने कुछ दिन पहले बेंगलुरु में सेंटर आफ एक्सीलेंस (सीओई) में अभ्यास करते देखा था। उन्होंने भारतीय टीम के नेट्स में भी बहुत मेहनत की है। उन्हें परिणाम भी मिल रहे हैं।



