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RCB को दूसरी IPL ट्रॉफी जिताते ही वाइफ नहीं इस खास शख्स के पास पहुंचे Rajat Patidar

 Rajat Patidar अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में आरसीबी के दूसरी आईपीएल ट्रॉफी जीतने के बाद जश्न अपने चरम पर था। जहां रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के खिलाड़ी दूसरी लगातार IPL ट्रॉफी जीतने के बाद मैदान पर जश्न मना रहे थे, ट्रॉफी के साथ तस्वीरें खिंचवा रहे थे, स्टेडियम में हजारों फैंस अपनी टीम की जीत का जश्न मना रहे थे, लेकिन इस शोर के बीच एक ऐसा पल भी देखने को मिला, जिसने हर किसी का दिल जीत लिया।

Rajat Patidar ट्रॉफी जीतने के बाद सीधे बचपन के दोस्त से मिलने पहुंचे

दरअसल, आरसीबी के दूसरी बार ट्रॉफी उठाने के कुछ मिनट बाद कप्तान रजत पाटीदार सीधे स्टेज से नीचे उतरे और अपनी वाइफ नहीं सबसे पहले अपने बचपन के दोस्त अभिषेक पाठरोड के पास पहुंचे। दोनों गले मिले और फिर पाटीदार ने मुस्कुराते हुए कहा, देखा… जीत गए। कर दिया ना मैंने।”

रजत की कप्तानी में आरसीबी ने लगातार दूसरी बार आईपीएल की ट्रॉफी जीतकर नायाब क्लब में एंट्री मारी। आरसीबी सीएसके और एमआई के बाद ट्रॉफी डिफेंड करने वाली तीसरी टीम बन गई है। इस खिताबी जीत के बाद उन्होंने कहा था,

“बहुत अच्छा लग रहा है। जब हम यहां आए तो पिछले साल की बहुत सारी यादें ताजा हो गईं। मरे पास बयान करने के लिए शब्द नहीं है, लेकिन बहुत अच्छा लग रहा है। ईमानदारी से बताऊं तो मैंने कभी आरसीबी का कप्तान बनने और ट्रॉफी उठाने का सपना नहीं देखा था। यह सबकुछ लिखा हुआ था। इसके लिए शुक्रगुजार हूं। हम पिछले साल के मुकाबले थोड़े ज्यादा कॉन्फिडेंट थे। फैंस ने हर जगह जाकर हमें जमकर सपोर्ट किया। मैं हर जगह होम ग्राउंड की तरह लगा।”

RCB ने लगातार दूसरी बार जीती आईपीएल ट्रॉफी

पाटीदार ने बीते सत्र में 192.69 के स्ट्राइक रेट से 501 रन बनाए। उनकी कप्तानी में आरसीबी ने न सिर्फ खिताब का सूखा खत्म किया बल्कि लगातार दो ट्रॉफियां जीतकर इतिहास भी रच दिया। शांत स्वभाव, दबाव में संयम और खिलाड़ियों पर भरोसा रखने की उनकी क्षमता ने उन्हें एक सफल कप्तान बना दिया। मैदान पर वह कभी भावनाओं में बहते नजर नहीं आते, लेकिन उनके फैसलों में आत्मविश्वास साफ दिखाई देता है।

पाटीदार ने किसे समर्पित की ट्रॉफी?

पाटीदार ने दूसरी खिताबी जीत को पिछले साल आरसीबी की जीत के जश्न के दौरान भगदड़ में मारे गए 11 प्रशंसकों को समर्पित किया। उन्होंने कहा, मैं हमेशा ये ट्रॉफी उन्हें समर्पित करना चाहूंगा। मेरे पास भावनाएं बयां करने के लिए शब्द नहीं हैं।

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