सेहत

ब्रेन इंजरी के बाद ‘साइलेंट किलर’ बन सकता है हाइड्रोसिफलस

ट्रॉमेटिक ब्रेन इंजरी (टीबीआई) यानी सिर की गंभीर चोट के बाद ठीक हो रहे मरीजों के लिए काशी हिंदू विश्वविद्यालय में चिकित्सा विज्ञान संस्थान में महत्वपूर्ण शोध हुआ है । रक्त में मौजूद विशेष सूजन संबंधी संकेतों के जरिये यह पहले ही पता लगाया जा सकता है कि मरीज को भविष्य में पोस्टमैटिक हाइड्रोसिफलस (दिमाग में पानी भरने की समस्या) होने का कितना खतरा है। सिर की चोट के बाद कई बार मरीजों के मस्तिष्क में तरल पदार्थ (सीएसएफ) जमा होने लगता है, जिसे हाइड्रोसिफलस कहते हैं इसका समय पर निदान करना डाक्टरों के लिए हमेशा चुनौती रहा है।

शोधकर्ताओं ने पाया कि शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली में होने वाले बदलावों को मापने वाले दो सूचकांक सिस्टेमिक इंफ्लेमेटरी रिस्पांस इंडेक्स (एसआईआरआई) और सिस्टेमिक इम्यून इंफ्लेमेशन इंडेक्स (एसआईआईआई) सटीक पूर्वानुमान में मदद कर सकते हैं। विशेषज्ञों ने सिर की सर्जरी कराने वाले 443 मरीजों पर दो वर्षों तक नजर रखी।

सर्जरी के बाद क्यों बढ़ जाता है ‘हाइड्रोसिफलस’ का खतरा?
शोध में शामिल मरीजों में से लगभग 12.42 प्रतिशत लोगों में आगे चलकर हाइड्रोसिफलस की समस्या विकसित हुई। जिन मरीजों में एसआईआरआई और एसआईआईआई का स्तर बढ़ा पाया गया, उनमें हाइड्रोसिफलस का खतरा काफी अधिक था। अस्पताल में भर्ती होते समय और छुट्टी मिलते समय मरीज की चेतना का स्तर के अलावा डिकम्प्रेसिव क्रेनिएक्टोमी (हड्डी हटाने वाली सर्जरी) कराने वाले मरीजों में भी अधिक जोखिम देखा गया। मरीज आइसीयू में कितने दिन रहा, इसका भी सीधा संबंध बीमारी से पाया गया।

प्रो. अनुराग साहू ने बताया कि सामान्य रक्त परीक्षण से ही उन मरीजों की पहचान कर सकेंगे, जिन्हें भविष्य में दिमाग में पानी भरने की समस्या हो सकती है। इससे समय रहते प्रभावी उपचार संभव होगा और मरीज की जान बचाई जा सकेगी। यह शोध इसी माह एशियन जर्नल आफ न्यूरोसर्जरी में प्रकाशित हुआ है। शोध टीम में न्यूरो सर्जरी विभाग के प्रो. अनुराग साहू, प्रो. रविशंकर प्रसाद, डॉ. कुमार वैभव और शोधार्थी सुमिता कुमारी शामिल हैं।

बीएचयू के न्यूरो सर्जरी विभाग में ब्रेन इंजरी के बाद मरीज की सीटी स्कैन रिपोर्ट। इसमें दिमाग में भरा पानी (काले रंग में) देखा जा सकता है।

अब पुरुष हों या महिलाएं, सभी को बराबर खतरा
चिकित्सा शोध के परिणामों ने पोस्ट ट्रामेटिक हेडएक (पीटीएच) यानी मस्तिष्क की चोट के बाद होने वाले सिरदर्द के कारणों और जोखिम कारकों पर नई रोशनी डाली है। आइसीयू में भर्ती रहे टीबीआई के मरीजों पर हुआ अध्ययन बताता है कि चोट के बाद पुराने सिरदर्द का उम्र या लिंग से संबंध नहीं है। पुरुष और महिला मरीजों के बीच कोई अंतर नहीं देखा गया।

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